Saturday, November 26, 2022
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Navratri 2022 8th Day Maa Mahagauri: नवरात्र के आठवें दिन करे महागौरी की पूजा, पुरी होगी मनोकामनाए

शारदीय नवरात्रि का आज आठवां दिन है. आज माँ महागौरी की पूजा विधान है. वैसे नवरात्रि के नौ दिनों में प्रति दिन देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है. लेकिन नवरात्रि के आठवें और नौवें दिन देवी दुर्गा के नौ रूपों के प्रतीक में कन्या पूजन का भी विधान है. जो इस पर्व के महत्व को और भी बढ़ा देता है. महागौरी का वर्ण एकदम गोरा है इन्हें भगवान् गणेश के माता के रूप में भी जाना जाता है, आज के दिन मां महागौरी की पूजा करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है और घर में खुशहाली छाई रहती है. आइए जानते हैं कैसे की जानी चाहिए माता की पूजा और क्या है इस दिन का महत्व-

माँ महागौरी का रूप और कथा

माँ अम्बे का आठवें रूप में माँ महागौरी का रंग श्वेत है, और वह इसी रंग के वस्त्र भी धारण करती हैं. माता महागौरी भैंस पर सवार होकर अपने भक्तों की प्रार्थना सुनने आती हैं. माँ की चार भुजाएं हैं और प्रत्येक भुजा में माता ने अभय मुद्रा, त्रिशूल, डमरू और वर मुद्रा धारण किया है.

कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, मां पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए कठिन तपस्या की। हजारों वर्षों तक माता के अन्न जल ग्रहण नहीं करने उनका शरीरर काला पड़ गया था। माता की तपस्या से प्रसन्न होकर भोलेनाथ ने उन्हें स्वीकार किया और माता के शरीर को गंगा के पवित्र जल से धोकर उनको अत्यंत कांतिमय बना दिया. इस वजह से माता पार्वती के इस स्वरूप को महागौरी कहा गया है. मान्यता है कि माता के इस स्वरूप की विधिवत पूजा अर्चना करने से सौंदर्य की प्राप्ति होती है तथा घर में सुख समृद्धि का वास होता है.

मां महागौरी की पूजा कैसे करे

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होने के बाद साफ- स्वच्छ वस्त्र धारण करें.
  • मां की प्रतिमा को गंगाजल या शुद्ध जल से स्नान कराएं. 
  • मां को सफेद रंग के वस्त्र अर्पित करें. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां को सफेद रंग पसंद है.
  • मां को स्नान कराने के बाद सफेद पुष्प अर्पित करें.
  • मां को रोली कुमकुम लगाएं.
  • मां को मिष्ठान, पंच मेवा, फल अर्पित करें.
  • मां महागौरी को काले चने का भोग अवश्य लगाएं.
  • मां महागौरी का अधिक से अधिक ध्यान करें.
  • मां की आरती भी करें.
  • अष्टमी के दिन कन्या पूजन का भी विशेष महत्व होता है. इस दिन कन्या पूजन भी करें.

पूजन मंत्र

मंत्र: या देवी सर्वभू‍तेषु माँ गौरी रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥

ओम देवी महागौर्यै नमरू

वन्दे वांछित कामार्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्।

सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा महागौरी यशस्वनीम्।।

माँ महागौरी की आरती 

जय महागौरी जगत की माया ।

जय उमा भवानी जय महामाया ॥

हरिद्वार कनखल के पासा ।

महागौरी तेरा वहा निवास ॥

चंदेर्काली और ममता अम्बे

जय शक्ति जय जय मां जगदम्बे ॥

भीमा देवी विमला माता

कोशकी देवी जग विखियाता ॥

हिमाचल के घर गोरी रूप तेरा

महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा 

सती ‘सत’ हवं कुंड मै था जलाया

उसी धुएं ने रूप काली बनाया ॥

बना धर्म सिंह जो सवारी मै आया

तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया ॥

तभी मां ने महागौरी नाम पाया

शरण आने वाले का संकट मिटाया ॥

शनिवार को तेरी पूजा जो करता

माँ बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता ॥

‘चमन’ बोलो तो सोच तुम क्या रहे हो

महागौरी माँ तेरी हरदम ही जय हो ॥

महाष्टमी का महत्व

नवरात्री की अष्टमी को महागौरी के पूजन से नौ देवियां प्रसन्न होती हैं. महागौरी का भगवान शिव ने अपने जटा से बह रही गंगाजल से अभिषेक किया. तत्पश्चात भगवती ने पूर्ण गौरवर्ण धारण किया. यह सौभाग्य की सूचक हैं. मां महागौरी की पूजा- अर्चना करने से विवाह में आ रही अडचने दूर हो जाती हैं. मां की कृपा से मनपंसद वर मिलता है. मां महागौरी की आराधना करने से संकट दूर होते हैं. पापों से मुक्ति मिलती है. व्यक्ति को सुख-समृद्धि के साथ सौभाग्य की प्राप्ति भी होती है.

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