Wednesday, November 23, 2022
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Vat Savitri Vrat 2022: वट सावित्री व्रत 30 मई को जानिए, तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा- विधि

वट सावित्री का व्रत ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। वट सावित्री के दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं। इस व्रत को उत्तर भारत के कई इलाकों जैसे पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और उड़ीसा में भी मनाया जाता है। इस दिन वट यानी बरगद के पेड़ की विधि-विधान से पूजा की जाती है |

माना जाता है कि वट वृक्ष की पूजा करने से लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य का फल प्राप्त होता है |इस बार वट सावित्री व्रत के दिन काफी अच्छा संयोग बन रहा है। इस दिन शनि जयंती होने के साथ खास योग भी बन रहा है। इस दिन सुबह 7 बजकर 12 मिनट से सर्वार्थ सिद्धि योग शुरू होकर 31 मई सुबह 5 बजकर 8 मिनट तक रहेगा। इस खास योग में पूजा करने से फल कई गुना अधिक बढ़ जाएगा।

वट सावित्री पूजा का शुभ मुहूर्त

29 मई को अमावस्या तिथि दोपहर में 2 बजकर 56 मिनट से लग रही है | और यह 30 मई को शाम में 5 बजे समाप्त हो जा रही है अबकी बार वट सावित्री का व्रत 30 मई सोमवार को किया जाएगा |वट सावित्री व्रत पूजा का उत्तम समय 30 मई 2022 को है |

सुबह 5 बजकर 25 मिनट से 7 बजकर 9 मिनट तक अमृत चौघड़िया, सुबह 8 बजकर 52 मिनट से 10 बजकर 36 मिनट तक शुभ चौघड़िया, दोपहर में 11 बजकर 55 मिनट से 12 बजकर 50 मिनट तक अभिजीत मुहूर 

वट सावित्री व्रत की पूजा सामाग्री

  • सावित्री-सत्यवान की मूर्तियां
  • बांस का पंखा
  • लाल कलावा
  • धूप
  • दीप
  • घी
  • फल
  • पुष्प
  • रोली
  • सुहाग का सामान
  • पूडियां
  • बरगद का फल
  • जल से भरा कलश
  • घर के बने व्यंजन
  • अक्षत
  • भीगे चने
  • कच्चा सूत

कैसे करे वट सावित्री के दिन पूजा

  • इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें | 
  • इसके बाद साफ कपड़े पहनकर पूरा श्रृंगार करें |
  • पूजा की पूरी सामग्री लेकर वट वृक्ष के नीचे जाएं | आप चाहे तो घर में छोटा सा वट वृक्ष लाकर भी पूजा कर सकती हैं |
  • पूजा करने से पहले उस जगह की अच्छे से सफाई कर लें और सारी सामग्री रख लें |
  • सावित्री- सत्यवान और यमराज की फोटो को वट वृक्ष के नीचे स्थापित करें |
  • फिर लाल कपड़ा, फल, फूल, रोली, मोली, सिन्दूर, चना आदि चीजें अर्पित करें |
  • पूजा करने के बाद बांस के पंखे से उनकी हवा करें |
  • इसके बाद बरगद के पेड़ पर लाल कलावा बांधते हुए 5, 11 या 21 बार परिक्रमा करें |
  • परिक्रमा लगाने के बाद कथा पढ़ें और वृक्ष की जड़ पर जल अर्पित करें |
  • इसके बाद घर लौट आएं और बांस के पंखे से पति की हवा करें, फिर पति के हाथ से पानी पीकर व्रत खोलें |
  • पूजा के बचे चने प्रसाद के तौर पर सभी को बांटें |
  • शाम के समय मीठा भोजन करें |

वट सावित्री के व्रत में चने का महत्व

ऐसा कहा जाता है की यमराज ने सत्यवान के प्राण चने के रूप में सावित्री को वापस लौटाए थे | जिसके बाद सावित्री ने इस चने को अपने पति के मुंह में रख दिया था, जिससे सत्यवान के प्राण वापस आ गए थे | इसलिए इस दिन चने का विशेष महत्व माना गया है |

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